top of page

दुर्घटनाएँ

nirajnabham
30 जन॰ 2025
1 मिनट पठन

सरपट भागती सड़कों पर

दुर्घटनाएँ प्रमाण हैं

मानवीयता के अवशेषों का

अन्यथा सब कुछ है-

यंत्रवत!

नींद में चलते आदमी सा।

ठहरे हुए पानी में

पत्थर की तरह डूबती हैं-

दुर्घटनाएँ!

पल दो पल का आलोड़न

फिर वही उबाऊ ठहराव

उत्सुकता लीलती एकरूपता। 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
आत्म स्वीकृति

तुम मिलोगी- तो ये आँखें नम होंगी तुम कहोगी मैं सुनूँगा पर बात कम होगी। तुम क्या हो मैं क्या हूँ सोचने से उमंगें कम होंगी। तुम चलती रहो...

 
 
 
डर

कभी-कभी लगता है नहीं होगी अगली सुबह चढ़ती रात के साथ बढ़ता है डर डर मौत का या जिंदगी का! अगले दिन की अलसाई सुबह करवट बदलता हूँ बिस्तर पर...

 
 
 
अस्तित्व

घटाटोप अंधकार में कामना की मैंने प्रकाश की मैं जो था ईश्वर किरणों पर सवार होकर चला नि:सीम यात्रा पर प्रकाश सिरजता चला राह में अंधकार चलता...

 
 
 

टिप्पणियां


9760232738

  • Facebook
  • Twitter
  • LinkedIn

©2021 by Bhootoowach. Proudly created with Wix.com

bottom of page