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आत्म स्वीकृति

nirajnabham
24 अग॰ 2025
1 मिनट पठन

तुम मिलोगी-

तो ये आँखें नम होंगी

तुम कहोगी

मैं सुनूँगा

पर बात कम होगी।

तुम क्या हो

मैं क्या हूँ

सोचने से उमंगें कम होंगी।

तुम चलती रहो

मैं चलता रहूँ

चलने से दूरियाँ कम होंगी।

तुम चाहती रहो

मैं चाहता रहूँ

चाहने से चाहत न कम होगी।

मिलन की चाहत

मैं क्यों करूँ

मिलने से बात खतम होगी।

बिछड़ने के दुख

बहुत है मगर

मिलने से उम्र क्या कम होगी।

फिर रहा मारा-मारा

ये किसकी मर्जी है

किसकी मर्जी से ये कम होगी।

सब कुछ तो

तू करता है

आदत ये तेरी न खतम होगी

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