top of page

वक्त लगता है

nirajnabham
29 जुल॰ 2024
1 मिनट पठन

निगाह का परदा हटाने में वक्त लगता है

हाल ए दिल जुबान पे आने में वक्त लगता है

 

वो मुझे पहचान लेगा है यकीन मुझको

खुद को पहचानने में बड़ा वक्त लगता है

 

दीदार-ए-यार होगा हर एक दीवार में

तस्वीर उभरने में थोड़ा तो वक्त लगता है

 

मसरूफ़ियतें तेरी जो कभी कम होती

जानते कि दिल बहलने में वक्त लगता है

 

चढ़ा कर ईमान सूली पर होता है तजुर्बा कोई

हलाल ओ हराम साबित होने में वक्त लगता है

 

यक़ीन नहीं किसी पर तो दुआ कर

दुआ कुबूल होने में भी वक्त लगता है

 

मुखातिब ए अंजाम हो गया हूँ ज़ालिम

एक बार मुस्कराने में कितना वक्त लगता है 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
कोई दीवाना नहीं आता आजकल इन गलियों में

चाँदनी रोती रही फिर तनहाई से लिपट कर आँसू जमा करती रही रात चादर बिछा कर क्या कुछ न कहा उनसे इजहार-ए-हाल के सिवा वो भी सुनते रहे फ़ासलों का समंदर बिछा कर फिर जो पूछा जिंदगी से क्या चाहिए आखिर तुम्ह

 
 
 
कर लिया सख्त इरादा अपना

जुबां पर सख्त है पहरा तो कर लिया सख्त इरादा अपना उठाया गया जो महफिल से हो गया मुकाबिल-ए-हुस्न आशिकी अपना लिया हाथ में पैमाना तो दिल...

 
 
 

टिप्पणियां


9760232738

  • Facebook
  • Twitter
  • LinkedIn

©2021 by Bhootoowach. Proudly created with Wix.com

bottom of page